मैनेँ अपनी जिँदगी मे
प्यार कभी नहीँ किया था,
मैँ मरा नहीँ परवानोँ की तरह कभी
प्यार जिँदगी से किया था,
क्योँ कि कभी देखा नहीँ
किसी ने प्यार से मेरी तरफ,
इसलिए अहसास प्यार का
हुआ ही नहीँ था,
लेकिन एक दिन खुदा की रहमत हुई
एक हसीना से आँखे चार हुई,
जबरदस्ती दिल मेँ मेरे उमंग जागी
वर्षो से सोई भूतनी इश्क की फिर जागी,
आगे तो मैँ गली मेँ खडना आवारगी समझता था
लेकिन दो चार दिन बीते
मैँ एक आध घंटा चौक मेँ खडा करता था,
उस लडकी से दोबारा मुलाकात हुई
मिलना जुलना फिर इकरार
सच्च मानोँ तो हमारे बीच
जल्द ही कोई दीवार न रही,
घुल मिल गये थोडे दिनोँ मेँ ऐसे
हो प्यार जन्मोँ से हमारा जैसे,
ऐसी गजब प्यार की कायम मिसाल हुई,
न रह सकते थे मिले बगैर एक दिन भी
याद मे उनकी लगी रहती थी एक अगन सी,
कभी होटल,कभी सिनेमा
कभी लेकर जाता क्लबोँ मेँ उसे
भले ही हाल मेरा बिल्कुल था,
लगभग एक महिना रही वो करती ऍश
कभी खाना पीना,कभी घूमना फिरना
कभी तो माँग भी लेती थी कैश,
घर वालोँ की तरफ से पैसोँ के लिए जवाब था
लेकर जाता लेकिन कहीँ से भी मैँ पैसे
यारो !सामने माशूक के तो मैँ नवाब था ।
खैर,अब मेरा इश्क कुछ ठंडा पड रहा था
होले होले सर पे कर्ज भी बहुत चढ गया था,
एक दिन मैनेँ बात सारी उसको बताई
भई उसने भी बहुत हमदर्दी जताई,
उस समय अहसास मुझे कुछ अपनोँ सा हुआ
चलो किसी ने तो जानी इस दिल की हाये दुहाई,
अब बहुत दिन बीते हमेँ मिले हुए
न गया मै उसके पास,न वो आई
मंदे इशक के कुछ हालात हुऐ,
एक दिन मैँ अपनी हीरो साईकल के साथ
जिसकी हालत कुछ ख्सता थी
साईकल वाले की दुकान पे खडा था
फटे टायर की बदौलत
एक बडा पटाखा टयूब मेँ पडा था,
तभी एक नई मोटरसाईकल
दो सवारीयोँ के साथ
आँधी की तरह मेरे पास से गुजरी
मैने मुँह मे ही उसे कुछ बुरा भला कहा
'तभी दिखाई पडा कुछ साफ यारो'
धूल मिट्टी की कुछ हटती जा रही थी
जो माशूक कल थी मेरी जिँदगी
वो आज नई मोटरसाईकल पे
किसी और के संग चली जा रही थी,
वो तो शायद इन बातोँ की आदी थी
लेकिन मेरा दिल बहुत रोया
ऐसा हुआ था मैँ इश्क मे अँधा
कि मैने अपना आप खोया था
टूटे दिल ने एक आवाज दी
कि बेदर्दी !मैँ तो तेरी
बेवफाई सह गया,
किसी और को धोखा मत देना
वो शायद नहीँ सहेगा,
काँटा तेरे प्यार का जिँदगी भर
दिल मेँ मेरे चुभता रहेगा
दिल मेँ ....,
(ये कविता करीब 16-17 साल पहले मैनेँ लिखी होगी,समझ कम थी पर जुनून
था,जैसी भी लिखी थी,वैसी ही आपकी नजर की है)
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Jagdish disha
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