न उनके आने की खबर थी
न उनके जाने का पता हमें,
कैसे कह दें, कि उनसे हमारी
जान-पहचान बहुत अच्छी है ;
उनसे मिला भी जाये तो कैसे
गर खुद ही न चाहें मिलना वो,
जुदाई को अकेले ही जिया हमने
कैसे माने कि उनके दिल में भी...
हमसे मुलाकात की तडप सच्ची है ;
शक्क नहीं हमें अपनी मुहब्बत पर
थोड़ा वो भी तो जताऐं चाहत अपनी,
संभव क्यों नही,दरिया से भी पार पाना
लगता है लेकिन इरादों की बेडी मे...
उनके लगी पतवार कच्ची है ;
इसीलिए तो.......
नहीं लगता कि पहचान अच्छी है
सच ही तो है...कहां पहचान अच्छी है।।
न उनके जाने का पता हमें,
कैसे कह दें, कि उनसे हमारी
जान-पहचान बहुत अच्छी है ;
उनसे मिला भी जाये तो कैसे
गर खुद ही न चाहें मिलना वो,
जुदाई को अकेले ही जिया हमने
कैसे माने कि उनके दिल में भी...
हमसे मुलाकात की तडप सच्ची है ;
शक्क नहीं हमें अपनी मुहब्बत पर
थोड़ा वो भी तो जताऐं चाहत अपनी,
संभव क्यों नही,दरिया से भी पार पाना
लगता है लेकिन इरादों की बेडी मे...
उनके लगी पतवार कच्ची है ;
इसीलिए तो.......
नहीं लगता कि पहचान अच्छी है
सच ही तो है...कहां पहचान अच्छी है।।
