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Tuesday, May 20, 2014

नहीं व्यर्थ हमारा चिंतन

इस बात में कोई शक्क नहीं कि हम सभी अपने भारत देश से बहुत प्यार करते हैं व सभी के मन में अपने वतन के प्रति बेहद स्नेहभाव है|इस बात की गवाह है वो चिंता,जो हर व्यक्ति अपने तरीके से देशहित्त के लिए घरों,चौपालों व अपने मित्रों से व्यक्त करता है|ये निस्वार्थ बातचीत हमारे देशप्रेम को साबित करती है,भले ही ये बातें हमें अपने मनोभाव के अनुरूप कोई सशक्त निर्णय लेने की ताकत नहीं देतीं मगर ये चिंतन हमें उस नेतृत्व की और आक्रषि्त करता है जो हमारी सोच पर पहरा देता नज़र आये|आहिस्ता-आहिस्ता ये बातें मुद्दों का रूप ले,विपक्षी राजनीतिक पार्टीयों की राजनीति को गति प्रदान करती हैं|गली मुहल्लों मे होने वाली ये बातचीत बडे स्तर पे होने वाले बदलाव में सहायक सिद्ध होती है,इसका परिणाम अचानक हुए बदलाव में दिखायी देता है,जिसकी शायद हमें आस तक नहीं होती|

चल...तु चल तो सही

चल ! ...तु चल तो सही
भविष्य बदल खुद अपना,

कोस न किसमत को अपनी
कर्म से पूर्ण हो...खुद सपना,

राह बदल गर मंजिल दूर
छोड किसी की पैड मेँ...
यूँ भटक के तु पाँव रखना,

वो कर जो तु कर सके
व्यर्थ गैरों की अग्न में तपना,

'दिश्शे' दिशा कोई नयी चुन
खूबसूरत बहुत जिंदगी ये
बूँद-बूँद समो आगोश...

पथरीले पथ पे मंजिल पाने
तुझसे तेज भागेगा...
जो,पाला है...तुमने सपना...!

Life mantras