यहाँ बूढा है बचपन मेरे वतन मे उमंगों का क्या ख़ाक सवेरा होगा ; कच्ची नींव पर वज़न है मंजिलों का इन घरों मे क्या ख़ाक बसेरा होगा ! (तस्वीर childlaboraroundtheworld के सोजन्य से)