25मार्च1948-27दिसंबर2013
फिल्म इंडस्ट्री में कई कलाकार ऐसे हैं जैसे एक सुंदर घर में रौशनी के श्रोत।अगर,देखने में बाहर से बहुत ही सुंदर है इंडस्ट्री तो भीतर की रौशनी हैं वो कलाकार जो किसी नम्बर की दौड़ में भाग अपने हुनर की चमक को ज़ाया नहीं करते।
फारुक शेख ऐसे ही सितारे थे,जिनकी रौशनी भले ही ज्यादा चकाचौंध भरी न थी मगर उनके बिना इंडस्ट्री उस प्रकृति की तरह अधूरी हो गई लगती है जिसमें सूरज चाँद तो हों,सितारे न हो।
इंडस्ट्री से एक ऐसा हीरा छिन गया जो थिऐटर समेत कई फिल्मों की चमक से हिंदी सिनेमा के ख़जाने को चमकाये हुए था।वो एक बढ़ीया एंकर भी थे।उनके अभिनय की खासीयत ही थी कि उनकी फिल्में आज भी बहुत अच्छी लगती है,मानों वे अदाकारी न कर रहे हों ब्लकि सच मे वही व्यक्ति हों जो पर्दे पे दिखाया जा रहा हो।
आज वो हमारे बीच नहीं रहे,मगर वो अपनी बेहतरीन फिल्मों के ज़रीऐ हमेशा हमारे यादों में जिंदा रहेंगें।
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