तुँ कुछ नहीँ,यहाँ क्या है तेरा,
समझ ले गर,बात इतनी तो,
कदम 'दिश्शे' खुदा के घर को,
बढा जान ले आज अभी से;
ये बात इतने ऋषि-मुनी,पीर-पैगंबर,संत साधु दरवेश लोग कई तरीकोँ से कह गये,बार-बार समझाने के पश्चात भी हम मे से कितने ऐसे लोग होँगेँ,जो समझ पाये और जो चल पाये उस रास्ते पे जो खुदा के घर जाता है ।
बहुत फर्क है कोई बात सिर्फ सुनने और समझने मेँ।हम ऐसी बातेँ बडे ध्यान से सुन तो जरुर लेते हैँ,लेकिन,उन्हे अपने जीवन मेँ ढाल नहीँ पाते।
क्या हमे थोडा सा वक्त उस भगवान का नाम लेने के लिए नहीँ निकालना चाहिए जिनकी कृपा से हम जीवन मेँ सभी सुख संसाधनो का उपयोग कर रहे हैँ,आनंद ले रहे है उसकी बनाई हर एक वस्तु का,जो कभी भी हमारी नहीँ थी,मगर, फिर भी उसने हमेँ बख्श दीँ।
ये बात हमे नहीँ भूलनी चाहिये कि इस शरीर मेँ जो आत्मा है,उसका ये पक्का ठिकाना नहीँ है अगर प्रभु ने हमेँ मौका दिया है,कि हम उसको खोज सकेँ और अपनी आत्मा को परमात्मा से मिला सकेँ तो हमेँ इस मौके का सही फायदा लेने की भरपूर कोशिश करनी चाहिए ।
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