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Tuesday, July 14, 2015

Child labor

यहाँ बूढा है बचपन मेरे वतन मे
उमंगों का क्या ख़ाक सवेरा होगा ;
कच्ची नींव पर वज़न है मंजिलों का
इन घरों मे क्या ख़ाक बसेरा होगा !
(तस्वीर childlaboraroundtheworld के सोजन्य से)

Tuesday, May 19, 2015

केवल शुरूआत ही मुश्किल








मुझे ये पेटिंग बनाने में शायद उतना वक्त नहीं लगा जितना इसे शुरू करने का मन बनाने के लिए लगा ! वैसे कागज़ पर तो अभ्यास अक्सर चलता रहता है परन्तु कैनवास पर काम करने के लिए जो तैयारी करनी पड़ती है वो खुला समय मांगती है;और एक दिक्कत मेरा ड्राईविंग का प्रोफेशन है जो मेरी रोज़ी-रोटी है.उसकी वजह से देर सवेर घर से बाहर रहना पड़ता है,इसलिए भी समय निकालना थोड़ा मुशकिल है.

किसी काम को अगर आप लम्बे अरसे से न कर रहे हों तो बहुत मुशकिल लगता है उस काम को नये सिरे से शुरू करना व उसे अंजाम तक पहुंचाना !

ख़ैर मैनें अपने शौक को दोबारा रंग मे रंगना शुरू कर दिया है,उसका परिणाम ये पेंटिंग है जो बहुत सारे बदलाव के बाद पूरी की....कोशिश रहेगी कि मैं किसी न किसी पेटिंग पर काम करता रहूं,व ये सिलसिला ताउम्र यूं ही चलता रहे !


Thursday, February 26, 2015

कुछ भी असंभव नहीं

"जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए आपकी इच्छाशक्ति मजबूत होनी चाहिए"
किसी के कहे ये शब्द कब जिंदगी का अहम सबक बन गये,याद नहीं ! लेकिन मैनें ये सबक केवल सीख़ा ही नहीं ब्लकि इसे गंभीरता पूर्वक अपनाया भी !
मेरा काम दिनभर गाड़ी चलाना है व पूरी तरह अपने काम के प्रति समर्पित भी हूँ ! कुल मिलाकर कह सकता हूँ कि अपने परिवार को भी कभी शिकायत का मौका नहीं दिया !


एक ख्याल जो रह-रह कर परेशान करता था कि सब मुझसे खुश हैं पर क्या मैं अपनी मानसिक संतुष्टि के लिए ख़ुद के लिए कुछ कर पाया ?
तो ये पाया कि 'नहीं'...मैं खुद के लिए कुछ नहीं जुटा पाया ! यहां मेरा ये कहने से अभिप्राय पूंजी या जायदाद बिल्कुल भी नहीं,अपितु मैं यहां अपनी पहचान की बात कर रहा हूँ..जोकि हर इन्सान का सपना होती है ! ये तभी संभव है जब आप कुछ ऐसा कर सकते हों जो दूसरे न कर सकें या किसी दूसरे से बेहतर कर सकें ! आपको अगर भगवान ने किसी ख़ास गुण से नवाज़ा है और आप अपने गुणों में और निख़ार लाते हैं तो निश्चय ही आप एक अलग पहचान पा सकते हैं ! अगर किसी कारणवश आप उस मुकाम तक न पहुंच पायें जिसके आप हक्कदार हैं,तो इस बात का रंज हमेशा बना रहेगा !


दिश्शा

ऐसा मैनें भी महसूस किया कि मुझे अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए थी ,जो संभव भी थी अगर थोडी मेहनत अपने गुण को निखारने के साथ-साथ उसके प्रदर्शन के लिए की होती !
ख़ैर देर आये,दुरूस्त आये !मैनें निश्चय किया है कि अब और देर नहीं ...मैं अपने चित्रकारी को एक मुकाम तक जरूर लेकर जाउँगा जहां मेरी पहचान सुनिश्चित हो सके !


( मैनें क्या कुछ सोचा है कुछ नया करने के लिए वो मैं आपको अपनी अगली पोस्ट में जल्द बताउंगा )


Friday, January 30, 2015

बेटीयाँ बचाओ...सृष्टि बचाओ


बेटी शब्द बोलते ही मन में स्नेह ,प्यार व हृदय में शुद्ध भाव भर जाता है ! नारी का बहन ,बेटी ,माँ और पत्नी के रूप में हमें मिलना उस भगवान का सबसे बड़ा वरदान ही तो है ! नारी के बिना सृष्टि का कोई वज़ूद नहीं ,ये जानते हुए भी हम कन्या भ्रूण हत्या जैसे पाप कर रहे हैं ! बेशक्क हम दुनियां की आंखों में धूल झोंक कर ऐसे घिनौने व गैरकुदरती कृत्य को अंजाम देने में सफल हो भी जायें लेकिन,कुदरत के काम मे दखल देने का ख़ामियाज़ा हमें किसी न किसी रूप में निश्चय ही भुगतना पडेगा !
सभी से निवेदन है कि बेटीयों के जन्म में बाधा न बनें ...
"बेटीयां बोझ नहीं , सिर का ताज़ हैं,"

Life mantras