1, जब मैँ 5 वर्ष का था तब मैँ सोचता था कि मेरे पिता दुनियाँ के सबसे
ताकतवर और समझदार व्यक्ति हैँ ।
2, जब मैँ 10 वर्ष का हुआ तब मैनेँ महसूस किया कि मेरे पिता को दुनियाँ
की हर चीज़ के बारे मेँ ज्ञान है ।
3, जब 15 वर्ष का हुआ तब मैनेँ महसूस किया कि मेरे पिता को दुनियाँ के
साथ चलने के लिए कुछ और ज्ञान की जरुरत है ।
4, जब 20 का हुआ तब महसूस किया कि पिता जी तो किसी और ही दुनियाँ के हैँ
और वे हमारी सोच के साथ नहीँ चल सकते ।
5, और 25 का हुआ तो महसूस हुआ कि पिता जी से किसी भी काम मेँ सलाह लेने
की जरुरत नहीँ है क्योँकि उन्हे हर काम मेँ कमी निकालने की आदत पड गयी है
।
6, जब 30 का हुआ तो महसूस करने लगा कि मेरे पिता को मेरी नक्ल से कुछ-कुछ
समझ आने लगी है ।
7, जब 35 का हुआ तब महसूस करने लगा कि अब उनसे छोटे मोटे फैसलोँ पर सलाह
ली जा सकती है ।
8, जब 40 वर्ष का हुआ तो मैने महसूस किया कि हर तरह के मामले मेँ पिता जी
की सलाह ली जा सकती है ।
9, जब मैँ 50 वर्ष का हुआ तब मैनेँ फैसला किया कि मुझे अपने पिता जी की
सलाह के बिना कुछ नहीँ करना चाहिए क्योँकि मुझे ये ज्ञान हो चुका था कि
मेरे पिता जी दुनियाँ के सबसे समझदार व्यक्ति है,पर....
मैँ अपने इस फैसले पर अमल कर पाता,इस से पहले ही पिता जी इस संसार को
अलविदा कह गऐ और मैँ अपने पिता जी की हर सलाह और तजुर्बे से वंचित रह
गया....!
Jagdish disha
No comments:
Post a Comment