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Monday, June 20, 2022

ਦਿਲਾਸੇ

ਕੁਝ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਚੈਟ ਦੀਆਂ
ਪੜ੍ਹ ਕੇ ਹੀ ਮਨ ਪਰਚਾ ਲਈਦੈ,
ਕੋਈ ਆਪਣਾ ਬਣਾ ਕੇ ਭੁੱਲ ਗਿਆ
ਹੌਂਸਲਾ ਦੇ ਕੇ ਮਨ,ਸਮਝਾ ਲਈਦੈ,
ਵਕਤ ਬਦਲ ਗਿਆ, ਸ਼ਾਇਦ
ਉਹ ਨਹੀਂ ਬਦਲਿਆ ਹੋਣਾ...
ਉਮੀਦ ਝੂਠੀ ਦਾ ਦੇ ਦਿਲਾਸਾ
ਭਰੋਸਾ ਪਿਆਰ ਦਾ ਬਚਾ ਲਈਦੈ,
ਨਹੀਂ ਹਰਖ਼ ਕਿ ਉਹ ਦੂਰ ਰਹਿਕੇ
ਰਾਜ਼ੀ ਹੈ, ਓਸਤੇ ਮੇਰਾ ਹੱਕ ਵੀ ਕੀ ?
ਚੁੱਪ ਰਹਿਕੇ, ਉਡੀਕਾਂ ਦਾ ਸਿਤਮ
ਤਨ ਆਪਣੇ ਉੱਤੇ ਹੰਢਾ ਲਈਦੈ...
ਤਨ ਆਪਣੇ ਉੱਤੇ.....!!!!!

Monday, February 28, 2022

Girl with horse

I think every day effort definitely leads to improvement.Just thinking makes the wings flutter but flight is not possible.
Girl with horse
Size: 24 inches ×36 inches
Medium: Oil colour
#DisshaArt #oilpainting

Thursday, April 8, 2021

ਤੋਲ ਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬਦਲੇ

ਤੇਰਾ ਮੈਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਨਾ
ਕੀ ਦੱਸਾਂ ਮੈਨੂੰ ਕੀ ਮੁੱਲ ਲੱਗੇ,
ਲੱਗੇ,ਤੋਲ ਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬਦਲੇ
ਬਸ ਓਹਨਾ ਦੋ ਘੜੀਆਂ ਦੇ
ਜਿੰਦ ਆਪਣੀ ਤੇਰੇ ਹਿੱਸੇ,
ਜਿਹਨਾਂ ਘੜੀਆਂ 'ਚ ਚੇਤਾ
ਮੇਰਾ ਤੂੰ ਕਰਦੀ ਏਂ...!

Monday, March 22, 2021

ਡਰ


ਐਨਾਂ....
ਕਿਉਂ ਡਰ ਲਗਦੈ ?
ਕਿ ਕਿਤੇ ਰੁੱਸ ਨਾ ਜਾਵੇ !
ਮਸਾਂ ਮਸਾਂ ਤਾਂ ਬਹੁੜਿਆ ਏ
ਮੁੜ ਸੱਜਣ ਦਿਲ ਦੇ ਵਿਹੜੇ,
ਚਾਵਾਂ ਭਰਿਆ ਭਾਂਡਾ
ਹੱਥੋਂ ਮੇਰੇ ਰੁੜ ਨਾ ਜਾਵੇ;
ਰੱਖਾਂ ਬੋਚ ਬੋਚ ਪੈਰ
ਨਾਲ ਓਹਦੇ ਚੱਲਣੇ ਨੂੰ,
ਕਾਹਲ ਕਰੀਂ ਤੋਂ ਹਰਖਿਆ
ਪਿੱਛੇ ਮੁੜ ਨਾ ਜਾਵੇ;
ਇਸ਼ਕ਼ ਕਮਾਉਣਾ ਨਹੀਂ ਸੌਖਾ
“ਦਿੱਸ਼ਾ"ਡਰੇ ਏਸੇ ਲਈ !
ਵਫ਼ਾ ਉਹਦੀ ਬਦਲੇ
ਵਜ਼ਨ ਮੇਰੇ ਇਸ਼ਕ ਦਾ
ਕਿਤੇ ਥੁੜ ਨਾ ਜਾਵੇ।



Monday, January 20, 2020

हुनर फ़रमानी नाज़ का

वाह...भगवान ने क्या हुनर दिया है इस फ़रमानी नाज़ को,आवाज़ व अदायगी...दोनों बा कमाल।ये कड़वी सच्चाई है कि गरीबी इन्सान की प्रतिभा को दबा कर रखती है। लेकिन कुछ लोग इनके जैसे,जब कोशिश करना नहीं छोडते और अपने हुनर को प्रदर्शित करने का प्रयास निरंतर करते रहते हैं। तब गरीबी की वही जंजीरें, वो सीढ़ियाँ भी बन सकती हैं,जो हमें बेहतर जीवन जीने की उस उंचाई पर पहुंचा देती हैं जिसकी हर मनुष्य को कामना रहती है।
 हम सभी को भगवान ने कुछ न कुछ ऐसे गुण जरूर दिये हैं जो गुण दुनिया में हमारी अपनी एक अलग पहचान बनाने में मदद करते हैं,बस जरूरत है कि हम अपने उन गुणों को कड़ी मेहनत से और अधिक निखारें व प्रदर्शित करें,तो फिर कोई वजह नहीं कि हम उम्र भर जीवन को भलीभांति व उल्लास से न जी पाएं।जो जीवन हमें निःसंदेह आनंद से जीने के लिए ही प्राप्त हुआ है ।
कलाकार- फ़रमानी नाज़
गाँव मुहम्मद पुर, मुजफ्फरनगर 
जगदीश कुमार दिश्शा 

Saturday, March 16, 2019

My New Watercolor Painting

This #watercolor #painting is ready today. As before, it was realized that it is only a picture of 21 × 29 centimeters in size and if it was made on large size papers, then I could have painted this image more accurately; Because this image is portrayed as #realistic, the subject is large and the details are too much, the place is probably even more needed.
Although I will definitely paint this image in bigger size, but before next I thought it should be shared with friends,so that views of people can be taken.
(Note: This picture is captured by a photographer named #"Sasin Tipchai", from which it was copied.)

Sunday, February 3, 2019

Quila Mubarak

#Qila Mubarak
“किला मुबारक” हमारे शहर पटियाला में एक प्रसिद्ध किला है। इसकी नींव 12 फरवरी 1763 को शहर के संस्थापक #बाबा आला सिंह ने रखी थी।
मैंने पहली बार ऐसा कोई सिटीस्केप पेंट करने की कोशिश की है। इस पेंटिंग को बनाने के दौरान, मुझे एहसास हुआ कि यह काम केवल देखने में आसान है, बनाना बहुत मुश्किल है। क्योंकि मैं इसे जैसा बनाने के बारे में सोच रहा था, शायद मैं उसका आधा भी बनाने में सफल नहीं हुआ क्योंकि इस माध्यम व इस शैली में पेंटिंग्स बनाने के लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है।खैर इस तरह के और प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
लेकिन फिलहाल मैं तेल रंगों के साथ एक नई पेंटिंग शुरू करने की तैयारी कर रहा हूं।जब बनेगी तब जरुर साझा करूंगा।

Disshaart

  • 'अदम' इन्सान जब गहरी नजर डाले हवादिस पर,
  • तो उसमें बेहतरी के भी बहुत असबाब होते हैं।
  • A Place in Quila Mubarak

    This #watercolor work which i did today on simple drawing sheet. actually i have also no idea that i will finish it on that paper but thank god, result is not bad.
    The place is a part of #Quila Mubarak in my city #Patiala and source of this beautiful pic from #bcmtouring.com.

    Hira Bagh

    My another #watercolor #painting...this beautiful location is built on #”Vaddi Nadi” when coming from the #Rajpura to #Patiala city, it is the center of attraction for the people coming towards the city. On the left side of this #statue is the #Gurdwara Sahib built by #Kar Sevaks.

    Monday, January 28, 2019

    The Mohindra College

    My new watercolor painting...Pride of Patiala city “The Mohindra College” which founded in 1875.
    When I was in my age of reading, I had a great desire to be taught here but it could not be.

    Friday, January 18, 2019

    ਆਟੇ ਦੀ ਢੋਲੀ

    ਕਿੱਥੋਂ ਲੈ ਜਾਂ ਘੁਮਾਉਣ ਜਿੱਦ ਕਰਦੇ ਜੁਆਕਾਂ ਨੂੰ
    ਹਾਲੇ ਭੁੱਖ ਆਲਾ ਪਾੜ ਤਾਂ ਪੂਰਿਆ ਜਾਵੇ ਨਾ,
    ਦਿਨੋਂ ਦਿਨ ਮਹਿੰਗਾਈ ਜਿਓਂ ਦਿਓ ਕੱਦ ਵਧੇ
    ਪੇੱਡਾ ਕਮਾਈ ਦਾ ਰੱਬਾ ਕਿਉਂ ਬੂਰਿਆ ਜਾਵੇ ਨਾ,
    ਢੋਲੀ ਆਟੇ ਦੀ ਭੁੱਖੀ ਭੁੱਬਾਂ ਮਾਰੇ ਰੋਜ਼ ਰੋਜ਼
    ਰਿਜਕ ਟੱਬਰ ਦੇ ਮੁੰਹੀਂ ਪੂਰਾ ਸੂਰਾ ਵੀ ਜਾਵੇ ਨਾ,
    “ਦਿੱਸ਼ਾ” ਰਾਹਾਂ ਦੀ ਭੱਜ ਭੱਜ ਨਿੱਤ ਵਾਟ੍ਹ ਮੁਕਾਵੇ
    ਰਾਹ ਭੈੜਾ ਇਹ ਕਿਸੇ ਮੰਜਲ ਵਲ ਨੂੰ ਜਾਵੇ ਨਾ,
    ਰਾਹ ਭੈੜਾ ਇਹ ਕਿਸੇ ਮੰਜਲ ਵਲ ਨੂੰ ਜਾਵੇ ਨਾ।
    Jagdish Kumar Dissha

    Tuesday, July 3, 2018

    Memories

    मैं अपने बनाए कुछ स्कैच आपसे शेयर करना चाहता हूँ।वैसे तो इन तस्वीरों मे कोई खास बात नहीं है लेकिन जिन हालात मे व जिस जगह मैंने ये बनाए वो मेरे लिए बहुत परेशानी का समय था।
    बात यूं है कि मुझे कुछ दिन किसी कारणवश कारागार मे बिताने पडे तो वहां मेरे लिए समय बिताना सबसे बडी चुनौती थी।न मालूम कि क्या वजह थी कि वहां पैन-पैनसि्ल व सफेद कागज मिलना करीब-करीब नमुमकिन था।औऱ बिना कागज पैंसिल के मेरे लिए कहीं भी रहना मुश्किल है।
    खैर कागज तो किसी तरह जुटा लिए जैसे कुछ प्रशासनिक काम करने वाले कैदियों से,कुछ अखबार मे आने वाले पंफलैट्स व कुछ पुरानी दवाई लिखी परचीयों की बैकसाइड वाले कागज।अब दिक्कत थी पैंसिल-रबड की।तो इसके लिए स्कूल (जो अशिक्षित बंदियो के लिए कारागार के ही भीतर चलाया जाता है) मे पढने के लिए जाने लगा।अब हिंदी,पंजाबी भाषा तो मैं भली प्रकार जानता हूं व अंग्रेजी भी,जितनी अपना काम चलाने के लिए जरूरी है...आती है।तो सोचा कि उर्दू सीख लेते हैं,अगर आ गई तो ठीक वर्ना जहां हैं वहां से तो कोई हिला नहीं सकता।
    बस एक दो दिन मे ही मुझे पैन-पैंसिल,रबड और स्लेट मिल गई।फिर स्कूल एक-दो दिन जाकर बंद कर दिया जाना।स्कूल छोडने की एक वजह ये भी थी कि उर्दू की किताब (कैदा) एक ही थी और उसे एक और पढने वाला ले गया व लौटाकर न गया,मेरे शिक्षक भी उसी किताब मे से पढ के समझा पाते थे।



                        दसम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी

    तो पहली जो दो तस्वीरें हैं ये वहां सजा काट रहे राजस्थान के राजू भाई के लिए बनाई,जो कैद के दौरान यहां पंजाब जेल मे रहते हुए सिक्ख धर्म से खासे प्रभावित हुए व अ्मृत छक के,हिंदू से सरदार हो गये।उनके लिए बनाई ,हाथ मे फूल लिए लडकी की तस्वीर असल मे देवदर्शन धूप के कवर के उपर छपी लडकी की है,जो राजू भाई को बेहद पसंद थी। जब उन्होंने कहा तो मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन क्या है जो बात किसी के दिल को अच्छी लग गई तो लग गई।अब ऐसी बात पे किसी बहस का कोई तुक नहीं बनता था,सो मैंने बना दी।
    दूसरी तस्वीर गुरु गोबिंद सिंह जी की है,जो एक पंजाबी मैगजीन “आत्म मार्ग” के कवर से कॉपी की थी।
    बाकी तस्वीरें अपना समय व्यतीत करने के लिए कभी अखबार से,कभी किसी रसाले से देख कर बनाई।
                                  गुलाम अली खां साहब

                                शिव कुमार बटालवी

                                   जवाहरलाल नेहरू

                        अभिनेता व पहलवान दारा सिंह

                                मुहम्मद अली जिन्ना

                                   डा.मनमोहन सिंह

    कुछ एक-दो पोट्रेट भी बनाए थे जो उन्हें ही दे दिये जिनके बनाए थे।

    Sunday, March 25, 2018

    A Cute Puppy


    my another watercolor painting.size 21 cm × 17cm.Reference photo taken from PC wallpaper. This medium are very dear to me but the problem is that the quality of the watercolor that are made from local manufacturer are not so good and nor do they have the appropriate brush to use watercolor and the goods that can be ordered online are very expensive. That's why I believe most of our artists use oil colors in India.

    Tuesday, February 27, 2018

    Red Avadavat bird in watercolor


    This Watercolor painting of a beautiful bird “Red avadavat”,The reason for painting this image is that I like this bird very much.
    Click the link below for more information about this bird.
    https://en.m.wikipedia.org/wiki/Red_avadavat

    Sunday, August 3, 2014

    कहानी छोटी तड़प गहरी

    बहुत याद आये वो गुज़रा जमाना
    आपकी एक झलक पाने को
    मेरा तड़प जाना...
    कभी दरवाजे पे निगाह तो कभी
    धूप में छत पे ही सूख जाना,
    तुम्हारे घर की वो
    पीछे की सीढियों पे निगाह तो
    हर वक्त रहती थी....
    तेरे दीदार को कई बार,तरस जाना...
    मिलने का मौका एक आध बार मिला
    केवल ख़तों से ही काम चलाना...
    सच कहूं मैं बिल्कुल अनाडी़ था
    कभी हाथ न पकडा,न गले लगाया
    लेकिन सच ये भी है कि आपके सिवा
    कोई और न था इस दिल में बस पाया...
    कितना प्यारे थे तुम मुझे
    ये कैसे बतलाऊं,खोल के दिल
    कैसे दिखलाऊं,
    तुम संग जिंदगी बिताने की चाह थी
    तुम बिन जिंदगी को जीना कैसे सिखाऊं...
    वक्त की तहों मे लिपट के बेशक्क
    मेरा प्यार थोडा दब सा गया था,
    लेकिन रूह पर लिखे तेरे नाम को
    मैं तो चाह कर भी न मिटा पाऊं...
    एक एक पल अपनी बर्बादी का
    नहीं भूला,मुझे आज भी याद है,
    दर्द जुदाई का बाद मुद्दत के
    आज भी बरकरार है ....
    अपनी आंखों के सामने अपना प्यार
    किसी और का होता,देखता रहा
    आखरी मुलाकात तुम छत पे आयी
    कुछ बात भी हुई शायद...
    फिर तो बस तारों को देखता रहा...
    शायद तुम्हे मेरी तड़प का अहसास
    इतना न हो,पर खुदा जानता है,
    अपनी जिंदगी को खोकर न रोये
    ये मेरा दिल है दिलबर...
    कहाँ मानता है.................!

    Life mantras