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Tuesday, July 2, 2013

'अविष्कार पेनिसिलिन का'

कई बार अचानक घटित हुई घटना,और उससे उजागर रहस्य,जिसके लिए कोई विशेष प्रयास न किया गया हो,मनुष्य जाति के लिए वरदान साबित हो जाता हैँ।
ऐसी ही एक घटना 28सतंबर1928 को लंदन के सेँट मेरी हास्पिटल मेँ घटी।अपनी लापरवाही से मजबूर एलैक्जेँडर ने जब कई दिनोँ की छुट्टी के बाद आकर लैब मेँ देखा कि जिस तश्तरी(Petrydish)मेँ फोडोँ की मवाद का नमूना खुला रख के भूल गये थे,उसमेँ फफूँद उग आई थी।उस तश्तरी को साफ करने से पहले जब माइक्रोस्कोप की मदद से देखा तो हैरान करने वाला तथ्य सामने आया कि जहाँ जहाँ फफूँद पनपी थी वहाँ बैक्टीरिया मर चुके थे।
तरीके से प्रयोग करने पर पाया कि फफूँद पेनिसिलियम नोटाडम थी,जिसमेँ संक्रामक रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता थी।तो,उन्ही फफूँदो से जो दवा बनी,उसे हम 'पेनिसिलिन'कहते हैं।
इस दवा के खोजकर्ता 'सर एलैक्जेँडर फ्लेमिंग'(जीववैज्ञानिक और औषधिनिर्माता)थे,जिनहे उनकी इस खोज के लिए सन1945 मेँ संयुक्त रुप से नोबेल पुरस्कार दिया गया।6अग्सत1881 को जनमेँ इस महान वैज्ञानिक का 74 वर्ष की उम्र मेँ लंदन स्थित उन्के घर मेँ हार्ट अटैक की वचह से 11मार्च1955 को निधन हो गया।

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