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Sunday, September 29, 2013

धुंधली यादें 22DISHA

ये तस्वीरें मेरे नाना-नानी जी की हैं।जो अब इस दुनियाँ में नहीँ हैं,लेकिन हमारे ज़हन में उन्की यादें हमेशा जीवित रहेंगीं।
इन दोनों की जिंदगी बहुत मुशकिलों भरी थी,मगर दोनों जब तक जीये,बडी जिंदादिली से जीये।जिंदगी अपनी ही धुन में बितायी।5 बेटीयाँ ही थीं उनके यहाँ,एक बेटा जो बहुत छोटी उम्र में ही गुज़र गया था।सब बेटीयों का पालन पोष्ण और बेटे को खोने का गम,फिर भी जीने का होंसला,मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि इतना साहस जुटा पाना,हर किसी के बस की बात नहीं होती।
खैर,मैँ काफी छोटा था जब नाना जी एक ऍक्सीडैंट में हमें छोड गये और कई वर्षो तक साहस जुटाये जीने के बाद आखिर नानी भी इस दुनियाँ से चली गयीं।
उनके साथ बहुत कम वक्त गुजारा है,तो धुंधली सी यादें हैँ दिमाग में,लेकिन उन्हे याद रखने के लिए काफी है।मैनें उनकी ये तस्वीरें बनायी हैं,जो यादों को ताज़ा रखने का माध्यम भी हैं और उनके प्रति हमारा स्नेह भी।
हमारे बुजुर्ग असल में जिंदगी का पूरी किताब की तरह होते है,जिस में से सीख लेकर हम अपनी कमीयों को सुधार सकते है,लेकिन ये अवसर हर किसी को नहीं मिलता।
अपने बुजुर्गों का सम्मान करें और उनके स्नेह के हकदार बनें।

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