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Tuesday, August 27, 2013

वाकई,शौक बडी चीज़ है..!

बहुत वर्षों के बाद आज फिर पैनसिल को पकडा तो पहले ये लगा कि जैसे सब भूल गया,लेकिन बिना सोचे जो पेपर शीट और पैनसिल कलर ले आया था सोच रहा था,उनका करुँ क्या ?तभी मेरे बेटे ने कहा पापा,ये कलर हमेँ दे दो और हमे ड्राईंग करना सिखाओ ।फिर न चाहते हुए भी उनके लिए एक चित्र बनाना शुरु कर दिया।आहिस्ता आहिस्ता उस चित्र को बनाने मे रम गया।पता ही नहीँ चला कब बच्चे मुझे चित्र बनाता छोड अपना खेल खेलने लगे।पर,मैँ तो सब भूल कर खो गया अपने उस शौक को पूरा करने में,जो पता नहीं कब का खो गया था जिंदगी की दौडधूप में।
जैसे जैसे मैं चित्र बनाता गया,मुझे लगने लगा कि मैनें बेवजह अपने शौक का गला घोंट दिया था,अब ऐसा नहीं होगा।मैँ आज से ही किसी न किसी तरह अपने शौक (जो कभी मेरी जिंदगी का लक्षय था)से जुडा रहूंगा।
जो दिक्कतेँ,परेशानीयाँ अकसर हमारी जिंदगी पे हावी रहती हैं,उन से कुछ पल निज़ात पाने का ये सबसे बढीया तरीका भी है।
(उस चित्र की एक प्रति मैँ यहाँ पोसट कर रहा हूँ)

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