बेटी शब्द बोलते ही मन में स्नेह ,प्यार व हृदय में शुद्ध भाव भर जाता है ! नारी का बहन ,बेटी ,माँ और पत्नी के रूप में हमें मिलना उस भगवान का सबसे बड़ा वरदान ही तो है ! नारी के बिना सृष्टि का कोई वज़ूद नहीं ,ये जानते हुए भी हम कन्या भ्रूण हत्या जैसे पाप कर रहे हैं ! बेशक्क हम दुनियां की आंखों में धूल झोंक कर ऐसे घिनौने व गैरकुदरती कृत्य को अंजाम देने में सफल हो भी जायें लेकिन,कुदरत के काम मे दखल देने का ख़ामियाज़ा हमें किसी न किसी रूप में निश्चय ही भुगतना पडेगा !
सभी से निवेदन है कि बेटीयों के जन्म में बाधा न बनें ...
"बेटीयां बोझ नहीं , सिर का ताज़ हैं,"

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