मेरा यकीन है कि एक राष्ट्र जिसे विदेशी छुरी की नोक पर झुकाया गया है,वह निरंतर युद्ध की स्थिती मेँ है ।चूंकि खुला युद्ध,निहत्थी प्रजाति के लिए असंभव बना दिया गया है,इसलिए मैनेँ अचानक से हमला किया । चूंकि मुझे बंदूकोँ से वंचित कर दिया गया तो मैनेँ अपनी पिस्तौल निकाली और गोली चलाई ।धन-संपदा से गरीब,लेकिन मस्तिष्क से बुद्धिमान,मेरे जैसे बेटे के पास माँ को देने के लिए कुछ नहीँ है,अपने खून के अलावा,इसलिए मैनेँ उसकी वेदी पर अपने खून का बलिदान दे दिया है ।एकमात्र सबक जिसकी जरुरत वर्तमान मेँ भारत को है,वह है यह सीखना कि कैसे मृत्यृ को प्राप्त हुआ जाए और इसे सिखाने का एकमात्र तरीका है कि हम खुद मृत्यृ को प्राप्त होँ ।मेरी ईश्वर से एक ही प्रार्थना है कि उसी माँ के पास मेरा पुनर्जन्म हो और मैँ इसी पवित्र प्रयोजन के लिए फिर से मरुँ तब तक,जब तक कि प्रयोजन सफल न हो जाए ।
वंदे मातरम ।
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