'अपने वतन को प्रेम करो,वतन जो जगह है,जहां तुम्हारे अभिभावक सोए हैँ,जहाँ तुमने वह भाषा बोली है,जो कि तुम्हारे दिल ने चुनी थी,जहाँ शरमाते हुए तुमने 'प्यार' का पहला शब्द कहा था ।यह वह घर है,जो खुदा ने तुम्हे दिया है,जिसमेँ तुम खुद को मुकम्मल बनाने के प्रयास करते रहो !'
गुसेपी मजीनी (इतालवी क्रांतिकारी)
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