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Friday, January 30, 2015

बेटीयाँ बचाओ...सृष्टि बचाओ


बेटी शब्द बोलते ही मन में स्नेह ,प्यार व हृदय में शुद्ध भाव भर जाता है ! नारी का बहन ,बेटी ,माँ और पत्नी के रूप में हमें मिलना उस भगवान का सबसे बड़ा वरदान ही तो है ! नारी के बिना सृष्टि का कोई वज़ूद नहीं ,ये जानते हुए भी हम कन्या भ्रूण हत्या जैसे पाप कर रहे हैं ! बेशक्क हम दुनियां की आंखों में धूल झोंक कर ऐसे घिनौने व गैरकुदरती कृत्य को अंजाम देने में सफल हो भी जायें लेकिन,कुदरत के काम मे दखल देने का ख़ामियाज़ा हमें किसी न किसी रूप में निश्चय ही भुगतना पडेगा !
सभी से निवेदन है कि बेटीयों के जन्म में बाधा न बनें ...
"बेटीयां बोझ नहीं , सिर का ताज़ हैं,"

Tuesday, December 9, 2014

ये नगमा किसी अनजान शायर का है ।

नामाबर अपना हवाओँ को बनाने वाले
अब न आयेँगेँ कभी पलट कर जाने वाले,
क्या मिलेगा तुझे बिखरे हुए ख्वाबोँ के सिवा
रेत पर चाँद की तस्वीर बनाने वाले,
मयकदेँ बंद हुऐ ढूँढ रहा हुँ तुमको
तु कहाँ है,मुझे आँखोँ से पिलाने वाले,
काश ले जाये कभी माँग कर आँखे मेरी
ऍ मुसाव्विर तेरी तस्वीर बनाने वाले,
तूँ इस अंदाज मेँ कुछ और हंसी लगता है
मुझ से मुँह फेरके गज़ले मेरी गाने वाले;

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'न मानोँ तो आजमा के देखो'

दग़ा खाते हैँ लोग,अपनी माशूकोँ से
खोटे सिक्कोँ याँ पुरानी बंदुकोँ से,
हमने खायी है दग़ा,यारोँ की यारी से
और अपनी ही वफ़ा के सुलुकोँ से,
दुश्मन भले ही लाख बुरा सही
जिसे देख के हम सावधान रहेँ,
लेकिन,अच्छा है उन सभी से
जिन यारोँ के साथ हमारे कारवाँ रहे,
संभले कोई भी अपना बुरा देखकर
गर सामने से कोई उसपे वार करे,
जिन्हे साथ साथ ले के घूमा करते थे कभी
आज मारने हमे,खडे हैँ वो,बगल मेँ तलवार धरे,
एतबार नहीँ गर तुमको हमारी बात का साथी
तो अतीत के पन्ने जरा पल्टा के देखो,
सबसे बडा दुश्मन तुम्हारा कोई अपना होगा
न मानोँ गर तो बात आजमा कर देखो..।
22दिश्शा (23.9.99)

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Life mantras