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Sunday, December 29, 2013

फारूक शेख

25मार्च1948-27दिसंबर2013
फिल्म इंडस्ट्री में कई कलाकार ऐसे हैं जैसे एक सुंदर घर में रौशनी के श्रोत।अगर,देखने में बाहर से बहुत ही सुंदर है इंडस्ट्री तो भीतर की रौशनी हैं वो कलाकार जो किसी नम्बर की दौड़ में भाग अपने हुनर की चमक को ज़ाया नहीं करते।
फारुक शेख ऐसे ही सितारे थे,जिनकी रौशनी भले ही ज्यादा चकाचौंध भरी न थी मगर उनके बिना इंडस्ट्री उस प्रकृति की तरह अधूरी हो गई लगती है जिसमें सूरज चाँद तो हों,सितारे न हो।
इंडस्ट्री से एक ऐसा हीरा छिन गया जो थिऐटर समेत कई फिल्मों की चमक से हिंदी सिनेमा के ख़जाने को चमकाये हुए था।वो एक बढ़ीया एंकर भी थे।उनके अभिनय की खासीयत ही थी कि उनकी फिल्में आज भी बहुत अच्छी लगती है,मानों वे अदाकारी न कर रहे हों ब्लकि सच मे वही व्यक्ति हों जो पर्दे पे दिखाया जा रहा हो।
आज वो हमारे बीच नहीं रहे,मगर वो अपनी बेहतरीन फिल्मों के ज़रीऐ हमेशा हमारे यादों में जिंदा रहेंगें।

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Saturday, November 30, 2013

मन जीतै...जग जीत।

मन की भी अपनी मौज है।कभी लगता है कि सब व्यर्थ है...और कभी सबकुछ अपना बनाने की होड़ में भागने लगता है।इस मन को समझने की कोशिश सदीयों से जारी है..ऋषि मुनी,ज्ञानी...हर कोई अपने अनुभव के अनुसार जनमानस के कल्याण हेतु अलग-अलग तरीकों से लोगों को इस विष्य पर समझाते रहे हैं।लेकिन,हर जीव के मन की अवस्था अलग है..और उसी अवस्था के परिणाम भी अलग हैं।जहाँ तक मेरी समझ काम करती है..मैं मानता हूँ कि मन अगर किसी सही काम में लग जाये तो इससे बेहतर कोई साथी नहीं है।अगर हमारा जीवन अव्यवस्थित तरीके से जीया जा रहा है तो परिणाम भी सार्थक नहीं होंगें।सबसे पहले हमें अपने जीवन को जीने के ढ़ंग को बदलना चाहिए...शुरुआत में अपने जीवन लक्षय को निर्धारित करना,फिर तय लक्षय की पूर्णता हेतु अपने प्रयासों को..कोशिश रुपी धागे में पिरोना और फिर अपना तन-मन पूरी तरह उसी कार्य को करने मे झोंक देना..ताकि हमें जीने का मक्सद मिल सके।फिर अपने आप घटने वाली घटनाओं से आपका अपना मन सही दिशा में सक्रिय हो जायेगा और रम जायेगा।आहिस्ता-2 सब सवालों से रुबरु आपका मन खुद जवाब ढूंढने में सक्षम हो जायेगा व व्यर्थ छूटता चला जायेगा।

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Sunday, September 29, 2013

धुंधली यादें 22DISHA

ये तस्वीरें मेरे नाना-नानी जी की हैं।जो अब इस दुनियाँ में नहीँ हैं,लेकिन हमारे ज़हन में उन्की यादें हमेशा जीवित रहेंगीं।
इन दोनों की जिंदगी बहुत मुशकिलों भरी थी,मगर दोनों जब तक जीये,बडी जिंदादिली से जीये।जिंदगी अपनी ही धुन में बितायी।5 बेटीयाँ ही थीं उनके यहाँ,एक बेटा जो बहुत छोटी उम्र में ही गुज़र गया था।सब बेटीयों का पालन पोष्ण और बेटे को खोने का गम,फिर भी जीने का होंसला,मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि इतना साहस जुटा पाना,हर किसी के बस की बात नहीं होती।
खैर,मैँ काफी छोटा था जब नाना जी एक ऍक्सीडैंट में हमें छोड गये और कई वर्षो तक साहस जुटाये जीने के बाद आखिर नानी भी इस दुनियाँ से चली गयीं।
उनके साथ बहुत कम वक्त गुजारा है,तो धुंधली सी यादें हैँ दिमाग में,लेकिन उन्हे याद रखने के लिए काफी है।मैनें उनकी ये तस्वीरें बनायी हैं,जो यादों को ताज़ा रखने का माध्यम भी हैं और उनके प्रति हमारा स्नेह भी।
हमारे बुजुर्ग असल में जिंदगी का पूरी किताब की तरह होते है,जिस में से सीख लेकर हम अपनी कमीयों को सुधार सकते है,लेकिन ये अवसर हर किसी को नहीं मिलता।
अपने बुजुर्गों का सम्मान करें और उनके स्नेह के हकदार बनें।

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Life mantras