इस बात में कोई शक्क नहीं कि हम सभी अपने भारत देश से बहुत प्यार करते हैं व सभी के मन में अपने वतन के प्रति बेहद स्नेहभाव है|इस बात की गवाह है वो चिंता,जो हर व्यक्ति अपने तरीके से देशहित्त के लिए घरों,चौपालों व अपने मित्रों से व्यक्त करता है|ये निस्वार्थ बातचीत हमारे देशप्रेम को साबित करती है,भले ही ये बातें हमें अपने मनोभाव के अनुरूप कोई सशक्त निर्णय लेने की ताकत नहीं देतीं मगर ये चिंतन हमें उस नेतृत्व की और आक्रषि्त करता है जो हमारी सोच पर पहरा देता नज़र आये|आहिस्ता-आहिस्ता ये बातें मुद्दों का रूप ले,विपक्षी राजनीतिक पार्टीयों की राजनीति को गति प्रदान करती हैं|गली मुहल्लों मे होने वाली ये बातचीत बडे स्तर पे होने वाले बदलाव में सहायक सिद्ध होती है,इसका परिणाम अचानक हुए बदलाव में दिखायी देता है,जिसकी शायद हमें आस तक नहीं होती|
Tuesday, May 20, 2014
चल...तु चल तो सही
चल ! ...तु चल तो सही
भविष्य बदल खुद अपना,
कोस न किसमत को अपनी
कर्म से पूर्ण हो...खुद सपना,
राह बदल गर मंजिल दूर
छोड किसी की पैड मेँ...
यूँ भटक के तु पाँव रखना,
वो कर जो तु कर सके
व्यर्थ गैरों की अग्न में तपना,
'दिश्शे' दिशा कोई नयी चुन
खूबसूरत बहुत जिंदगी ये
बूँद-बूँद समो आगोश...
पथरीले पथ पे मंजिल पाने
तुझसे तेज भागेगा...
जो,पाला है...तुमने सपना...!
Sunday, December 29, 2013
फारूक शेख
25मार्च1948-27दिसंबर2013
फिल्म इंडस्ट्री में कई कलाकार ऐसे हैं जैसे एक सुंदर घर में रौशनी के श्रोत।अगर,देखने में बाहर से बहुत ही सुंदर है इंडस्ट्री तो भीतर की रौशनी हैं वो कलाकार जो किसी नम्बर की दौड़ में भाग अपने हुनर की चमक को ज़ाया नहीं करते।
फारुक शेख ऐसे ही सितारे थे,जिनकी रौशनी भले ही ज्यादा चकाचौंध भरी न थी मगर उनके बिना इंडस्ट्री उस प्रकृति की तरह अधूरी हो गई लगती है जिसमें सूरज चाँद तो हों,सितारे न हो।
इंडस्ट्री से एक ऐसा हीरा छिन गया जो थिऐटर समेत कई फिल्मों की चमक से हिंदी सिनेमा के ख़जाने को चमकाये हुए था।वो एक बढ़ीया एंकर भी थे।उनके अभिनय की खासीयत ही थी कि उनकी फिल्में आज भी बहुत अच्छी लगती है,मानों वे अदाकारी न कर रहे हों ब्लकि सच मे वही व्यक्ति हों जो पर्दे पे दिखाया जा रहा हो।
आज वो हमारे बीच नहीं रहे,मगर वो अपनी बेहतरीन फिल्मों के ज़रीऐ हमेशा हमारे यादों में जिंदा रहेंगें।
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फिल्म इंडस्ट्री में कई कलाकार ऐसे हैं जैसे एक सुंदर घर में रौशनी के श्रोत।अगर,देखने में बाहर से बहुत ही सुंदर है इंडस्ट्री तो भीतर की रौशनी हैं वो कलाकार जो किसी नम्बर की दौड़ में भाग अपने हुनर की चमक को ज़ाया नहीं करते।
फारुक शेख ऐसे ही सितारे थे,जिनकी रौशनी भले ही ज्यादा चकाचौंध भरी न थी मगर उनके बिना इंडस्ट्री उस प्रकृति की तरह अधूरी हो गई लगती है जिसमें सूरज चाँद तो हों,सितारे न हो।
इंडस्ट्री से एक ऐसा हीरा छिन गया जो थिऐटर समेत कई फिल्मों की चमक से हिंदी सिनेमा के ख़जाने को चमकाये हुए था।वो एक बढ़ीया एंकर भी थे।उनके अभिनय की खासीयत ही थी कि उनकी फिल्में आज भी बहुत अच्छी लगती है,मानों वे अदाकारी न कर रहे हों ब्लकि सच मे वही व्यक्ति हों जो पर्दे पे दिखाया जा रहा हो।
आज वो हमारे बीच नहीं रहे,मगर वो अपनी बेहतरीन फिल्मों के ज़रीऐ हमेशा हमारे यादों में जिंदा रहेंगें।
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