चल ! ...तु चल तो सही
भविष्य बदल खुद अपना,
कोस न किसमत को अपनी
कर्म से पूर्ण हो...खुद सपना,
राह बदल गर मंजिल दूर
छोड किसी की पैड मेँ...
यूँ भटक के तु पाँव रखना,
वो कर जो तु कर सके
व्यर्थ गैरों की अग्न में तपना,
'दिश्शे' दिशा कोई नयी चुन
खूबसूरत बहुत जिंदगी ये
बूँद-बूँद समो आगोश...
पथरीले पथ पे मंजिल पाने
तुझसे तेज भागेगा...
जो,पाला है...तुमने सपना...!
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