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Saturday, July 20, 2013

Nazm of Baba Nazmi

'ਅੱਖਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਮੁੰਦਰ ਰੱਖਾਂ,ਮੈਂ ੲਿਕਬਾਲ ਪੰਜਾਬੀ ਦਾ
ਝੱਖੜਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਦਿੱਤਾ ੲੇ,ਦੀਵਾ ਬਾਲ ਪੰਜਾਬੀ ਦਾ,
ਜਿਹੜੇ ਅਾਖਣ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬੀ,ਵੁਸੱਤ ਨਹੀਂ ਤਹਿਜੀਬ ਨਹੀਂ
ਪੜਕੇ ਵੇਖਣ ਵਾਰਿਸ,ਬੁੱਲਾ,ਬਾਹੂ ਲਾਲ ਪੰਜਾਬੀ ਦਾ,
ਲੋਕੀਂ ਮੰਗ-ਮੰਗਾ ਕੇ ਅਾਪਣਾ,ਬੋਹਲ ਬਣਾ ਕੇ ਬਹਿ ਗੲੇ ਨੇ
ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਮਿੱਟੀ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ੲੇ,ਸੋਨਾ ਮਾਲ ਪੰਜਾਬੀ ਦਾ,
ਮਾਂ ਬੋਲੀ ਦੀ ਘਰ ਵਿੱਚ ੲਿੱਜਤ,ਕੰਮੀ ਜਿੰਨੀ ਵੇਖ ਰਿਹਾ
ਦੇਸ ਪਰਾੲੇ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ,ਖਬਰੈ ਹਾਲ ਪੰਜਾਬੀ ਦਾ ;
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ਬਾਬਾ ਨਜ਼ਮੀ (ਪਾਕਿਸਤਾਨ)

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Wednesday, July 17, 2013

ये अजीबो-गरीब शौकीन व्यक्ति

बगदाद के खलीफा हारुन अल राशिद को दान देने का भूत सवार रहता था।वह प्रतिदिन घोडे पर सवार होकर शहर से गुजरता था और जो भी सामने पड जाता उसकी और चाँदी के सौ टुकडोँ से भरी थैली उछाल देता था।इस तरह 12वर्षोँ तक यही क्रम चलता रहने से वह कंगाल हो गया।
मिस्र के टकसाल के मालिक खलील घाहेटी ने अपने जीवन काल मेँ कई बार मक्का की यात्रा की।वह 800मील लम्बी यात्राओँ के दौरान मार्ग मेँ सोने की मोहरेँ बिछवाता था,ताकि उसका ऊँट प्रत्येक कदम सोने पर रखे।कारवां गुजर जाने के बाद राही उन सिक्कोँ को उठा लेते थे।उसका कोष इसी तरह समाप्त हो गया।
हैदराबाद के छठे निज़ाम मीर महबूब अली को प्रतिदिन नई पोशाक पहनने का शौक था।
मंगोलिया के शेख शाहरुख ने अपने 43 जन्मदिन अनोखे ढंग से मनाये।उसके जन्मदिन पर जो भी उसके दरवाजे पर आता उसे हीरे-मोती-पन्नोँ से भरा थाल दिया जाता था,43 वर्षोँ तक ये परम्परा चलते रहने से उसका कोष समाप्त हो गया।
स्पेन के अधिकृत गायना(अफ्रीका)मे एक सम्राट व्यूविस्त्र को हर रोज मूल्यवान सिंहासन पर बैठने का शौक था और एक बार बैठने के बाद वो उसे नदी मेँ प्रवाहित करवा देता था।
(मंथन)प्रस्तुति:जनकराम साहू

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Tuesday, July 16, 2013

कुसूर-ऐ-नज़र

कुछ तो तेरी नज़र का
कुसूर था जरुर,ऍ साकी,
डोल गये जो कदम,वर्ना
महफिलेँ तो रोज़ की बात हैँ...;

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Life mantras