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Monday, April 4, 2016

दीदार

जुबां पे मेरी हर वक्त
खुदा के बाद जिसका
नाम आता है.......
वो संगदिल है इतना
कि मिले बिन ही
निकल जाता है,
खैर...
चलो कोई बात नहीं
गुरूर उसका भी
खुदा सलामत रखे,
मुझे भी उसके
दीद की तडप
कयामत तक रहे,
कभी वो वक्त
भी जरूर आयेगा
जब दिल उसका भी
पसीज जायेगा,
इश्क नाम नहीं
सहज ही दीदार का
मजा तब है जब
अपने आप
खिचां आये
तेरी चौखट पे
कदम यार का।
जगदीश "दिश्शा"
(४अप्रैल२०१६)

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