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Monday, January 28, 2019

The Mohindra College

My new watercolor painting...Pride of Patiala city “The Mohindra College” which founded in 1875.
When I was in my age of reading, I had a great desire to be taught here but it could not be.

Friday, January 18, 2019

ਆਟੇ ਦੀ ਢੋਲੀ

ਕਿੱਥੋਂ ਲੈ ਜਾਂ ਘੁਮਾਉਣ ਜਿੱਦ ਕਰਦੇ ਜੁਆਕਾਂ ਨੂੰ
ਹਾਲੇ ਭੁੱਖ ਆਲਾ ਪਾੜ ਤਾਂ ਪੂਰਿਆ ਜਾਵੇ ਨਾ,
ਦਿਨੋਂ ਦਿਨ ਮਹਿੰਗਾਈ ਜਿਓਂ ਦਿਓ ਕੱਦ ਵਧੇ
ਪੇੱਡਾ ਕਮਾਈ ਦਾ ਰੱਬਾ ਕਿਉਂ ਬੂਰਿਆ ਜਾਵੇ ਨਾ,
ਢੋਲੀ ਆਟੇ ਦੀ ਭੁੱਖੀ ਭੁੱਬਾਂ ਮਾਰੇ ਰੋਜ਼ ਰੋਜ਼
ਰਿਜਕ ਟੱਬਰ ਦੇ ਮੁੰਹੀਂ ਪੂਰਾ ਸੂਰਾ ਵੀ ਜਾਵੇ ਨਾ,
“ਦਿੱਸ਼ਾ” ਰਾਹਾਂ ਦੀ ਭੱਜ ਭੱਜ ਨਿੱਤ ਵਾਟ੍ਹ ਮੁਕਾਵੇ
ਰਾਹ ਭੈੜਾ ਇਹ ਕਿਸੇ ਮੰਜਲ ਵਲ ਨੂੰ ਜਾਵੇ ਨਾ,
ਰਾਹ ਭੈੜਾ ਇਹ ਕਿਸੇ ਮੰਜਲ ਵਲ ਨੂੰ ਜਾਵੇ ਨਾ।
Jagdish Kumar Dissha

Tuesday, July 3, 2018

Memories

मैं अपने बनाए कुछ स्कैच आपसे शेयर करना चाहता हूँ।वैसे तो इन तस्वीरों मे कोई खास बात नहीं है लेकिन जिन हालात मे व जिस जगह मैंने ये बनाए वो मेरे लिए बहुत परेशानी का समय था।
बात यूं है कि मुझे कुछ दिन किसी कारणवश कारागार मे बिताने पडे तो वहां मेरे लिए समय बिताना सबसे बडी चुनौती थी।न मालूम कि क्या वजह थी कि वहां पैन-पैनसि्ल व सफेद कागज मिलना करीब-करीब नमुमकिन था।औऱ बिना कागज पैंसिल के मेरे लिए कहीं भी रहना मुश्किल है।
खैर कागज तो किसी तरह जुटा लिए जैसे कुछ प्रशासनिक काम करने वाले कैदियों से,कुछ अखबार मे आने वाले पंफलैट्स व कुछ पुरानी दवाई लिखी परचीयों की बैकसाइड वाले कागज।अब दिक्कत थी पैंसिल-रबड की।तो इसके लिए स्कूल (जो अशिक्षित बंदियो के लिए कारागार के ही भीतर चलाया जाता है) मे पढने के लिए जाने लगा।अब हिंदी,पंजाबी भाषा तो मैं भली प्रकार जानता हूं व अंग्रेजी भी,जितनी अपना काम चलाने के लिए जरूरी है...आती है।तो सोचा कि उर्दू सीख लेते हैं,अगर आ गई तो ठीक वर्ना जहां हैं वहां से तो कोई हिला नहीं सकता।
बस एक दो दिन मे ही मुझे पैन-पैंसिल,रबड और स्लेट मिल गई।फिर स्कूल एक-दो दिन जाकर बंद कर दिया जाना।स्कूल छोडने की एक वजह ये भी थी कि उर्दू की किताब (कैदा) एक ही थी और उसे एक और पढने वाला ले गया व लौटाकर न गया,मेरे शिक्षक भी उसी किताब मे से पढ के समझा पाते थे।



                    दसम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी

तो पहली जो दो तस्वीरें हैं ये वहां सजा काट रहे राजस्थान के राजू भाई के लिए बनाई,जो कैद के दौरान यहां पंजाब जेल मे रहते हुए सिक्ख धर्म से खासे प्रभावित हुए व अ्मृत छक के,हिंदू से सरदार हो गये।उनके लिए बनाई ,हाथ मे फूल लिए लडकी की तस्वीर असल मे देवदर्शन धूप के कवर के उपर छपी लडकी की है,जो राजू भाई को बेहद पसंद थी। जब उन्होंने कहा तो मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन क्या है जो बात किसी के दिल को अच्छी लग गई तो लग गई।अब ऐसी बात पे किसी बहस का कोई तुक नहीं बनता था,सो मैंने बना दी।
दूसरी तस्वीर गुरु गोबिंद सिंह जी की है,जो एक पंजाबी मैगजीन “आत्म मार्ग” के कवर से कॉपी की थी।
बाकी तस्वीरें अपना समय व्यतीत करने के लिए कभी अखबार से,कभी किसी रसाले से देख कर बनाई।
                              गुलाम अली खां साहब

                            शिव कुमार बटालवी

                               जवाहरलाल नेहरू

                    अभिनेता व पहलवान दारा सिंह

                            मुहम्मद अली जिन्ना

                               डा.मनमोहन सिंह

कुछ एक-दो पोट्रेट भी बनाए थे जो उन्हें ही दे दिये जिनके बनाए थे।

Life mantras